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Akbar Birbal Ki Kahani | Akbar Birbal Stories In Hindi – Hindi Stories For Kids

Akbar Birbal Stories In Hindi 

बीरबल को केवल उनकी उत्कृष्ट बुद्धि के लिए ही नहीं जाना जाता था, बल्कि उनके दिमाग और बुद्धि की त्रुटिहीन उपस्थिति के लिए भी जाना जाता था। यहाँ अकबर और बीरबल की कहानियों के बारे में कुछ प्रसिद्ध रोचक और छोटी मजेदार कहानियाँ हैं जो आपके Kids को रोमांचित कर देंगी –

Akbar Birbal Stories In Hindi 

अकबर-बीरबल की 5 कहानी

  • अकबर-बीरबल की कहानी: सबकी सोच एक जैसी
  • अकबर-बीरबल की कहानी: मुर्गी पहले आई या अंडा?
  • अकबर-बीरबल की कहानी: आधा इनाम
  • अकबर-बीरबल की कहानी: अंधे या देखने वाले
  • अकबर-बीरबल की कहानी: कौन है असली मां?

 

अकबर-बीरबल की कहानी: सबकी सोच एक जैसी

एक बार राजा अकबर अपने दरबार में किसी खास विषय पर चर्चा कर रहे थे। उस विषय पर उन्होंने राज दरबार में मौजूद सभी लोगों से उनकी राय मांगी। ऐसे में दरबार में उपस्थित सभी मंत्रीगणों ने अपनी-अपनी बुद्धि के हिसाब से जवाब दिया। राजा यह देखकर बहुत हैरान हुए कि सभी का जवाब एक दूसरे से बिल्कुल अलग था। इस पर राजा अकबर ने बीरबल से ऐसा होने के पीछे की वजह पूछी और सवाल किया, ‘आखिर सबकी सोच एक जैसी क्यों नहीं होती?’

Akbar Birbal Stories In Hindi 

राजा के सवाल पर बीरबल मुस्कुराया और कहा, ‘महाराज बेशक लोगों की सोच एक दूसरे से कई मामलों में अलग होती है, मगर कुछ खास विषयों पर सबकी सोच एक जैसी ही होती है।’ बीरबल की इस बात के साथ दरबार की कार्यवाही समाप्त होती है और सभी अपना-अपना काम करने के लिए चले जाते हैं।

उसी शाम राजा अकबर बीरबल के साथ अपने बाग में टहलने जाते हैं, तब वो दोबारा वही सवाल दोहराते हैं। ‘बीरबल मैंने तुमसे पूछा था कि सबकी सोच एक जैसी क्यों नहीं होती? इस सवाल का जवाब दो मुझे।’ इसी के साथ एक बार फिर अकबर और बीरबल के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ जाती है। जब लाख कोशिशों के बावजूद राजा अकबर को बीरबल की बात नहीं समझ आती, तो वह अपनी बात को समझाने के लिए एक युक्ति निकालता है।

Hindi Stories For Kids

बीरबल कहता है, ‘महाराज मैं आपको साबित कर दूंगा कि कुछ मामलों में सबकी सोच एक जैसी ही होती है। बस आप एक फरमान जारी कर दीजिए। फरमान यह होगा कि आने वाली अमावस्या की रात को सभी अपने-अपने घर से एक लोटा दूध लाकर आपके बाग में बने सूखे कुएं में डालेंगे और इस फरमान को न मानने वाले को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।’

वैसे तो राजा अकबर को बीरबल की यह बात मूर्खता वाली लगती है, लेकिन वह बीरबल के कहे अनुसार शाही फरमान जारी करवा देते हैं। राजा के आदेश से सिपाही पूरे राज्य में घूम-घूम कर इस फरमान के बारे में सभी को बताते है। राजा के इस फरमान को सुनते ही सभी में इस बात को लेकर चर्चा होने लगी कि सूखे कुएं में दूध डालना एक मूर्खता पूर्ण कार्य है। फिर भी राजा का फरमान था, तो मानना सभी को था। सभी अमावस्या की रात का इंतजार करने लगे।

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देखते-देखते अमावस्या की रात भी आ गई और सभी अपने-अपने घर से एक-एक भरा लोटा लेकर कुएं के पास जमा हो जाते हैं। बारी-बारी सभी कुएं में लोटा पलट कर अपने-अपने घर की ओर चले जाते हैं। यह सारा नजारा राजा अकबर और बीरबल छिप कर देख रहे होते हैं।

जब सभी अपना लोटा कुएं में पलट कर चले जाते हैं, तो बीरबल राजा अकबर को कुएं के नजदीक ले जाते हैं और कहते हैं, ‘महाराज देखिए क्या आपके फरमान से कुआं दूध से भर गया? बीरबल की बात पर राजा अकबर कुएं में झांक कर देखते हैं कि कुआं ऊपर तक पानी से भरा हुआ है। यह देखकर उन्हें बहुत आश्चर्य होता है और वे नाराज भी होते हैं।

राजा अकबर बीरबल से कहते हैं, ‘मैंने तो कुएं में दूध डालने का फरमान जारी किया था। फिर कुआं दूध की जगह पानी से क्यों भरा गया?’ राजा के इस सवाल पर बीरबल मुस्कुराते हुए कहता है, ‘महाराज कुएं में दूध डालना सभी को व्यर्थ लगा, इसलिए सभी ने दूध की जगह कुएं में पानी डाला। उन सभी ने यह भी सोचा कि अमावस्या की रात घना अंधेरा होता है। अब इतने अंधेरे में सभी को सिर्फ लोटा ही दिखेगा, न कि लोटे में दूध है या पानी।

बीरबल बोला, ‘महाराज इस बात से स्पष्ट होता है कि कुछ मामलों में सभी की सोच एक जैसी होती है।’ अब राजा अकबर को बीरबल की बात अच्छे से समझ आ गई थी।

कहानी से सीख
इस कहानी से यही सीख मिलती है कि एक जैसी व्यक्तिगत स्थिति होने पर सभी की सोच एक जैसी हो जाती है।

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अकबर-बीरबल की कहानी: मुर्गी पहले आई या अंडा?

एक दिन की बात है, बादशाह अकबर की राजसभा में एक ज्ञानी पंडित आया हुआ था। वह कुछ सवालों के जवाब बादशाह से जानना चाहता था, लेकिन बादशाह के लिए उसके सवालों का जवाब देना मुश्किल हो गया। इसलिए, उन्होंने पंडित के सवालों के जवाब देने के लिए बीरबल को आगे कर दिया। बीरबल की चतुराई से सभी वाकिफ थे और सभी को उम्मीद थी कि बीरबल पंडित के हर सवाल का जवाब आसानी से दे सकते हैं।

पंडित ने बीरबल से कहा, “मैं तुम्हें दो विकल्प देता हूं। एक या तो तुम मुझे मेरे 100 आसान से सवाल के जवाब दो या फिर मेरे एक मुश्किल सवाल का जवाब दो।” बीरबल ने सोच-विचार करने के बाद कहा कि मैं आपके एक मुश्किल सवाल का जवाब देना चाहता हूं।

फिर पंडित ने बीरबल से पूछा, तो बताओ मुर्गी पहले आई या अंडा। बीरबल ने तुरंत पंडित को जवाब दिया कि मुर्गी पहले आई। फिर पंडित ने उनसे पूछा कि तुम इतनी आसानी से कैसे बोल सकते हो कि मुर्गी पहले आई। इस पर बीरबल ने पंडित से कहा कि यह आपका दूसरा सवाल है और मुझे आपके एक सवाल का ही जवाब देना था।

ऐसे में पंडित, बीरबल के सामने कुछ बोल नहीं पाया और बिना बोले ही दरबार से चला गया। बीरबल की चतुराई और अक्लमंदी को देखकर अकबर हमेशा की तरह ही इस बार भी बहुत खुश हुए। इससे बीरबल ने साबित कर दिया कि बादशाह अकबर के दरबार में सलाहकार के रूप में बीरबल का रहना कितना जरूरी है।

कहानी से सीख
सही तरह से दिमाग लगाने और संयम रखने से हर सवाल का जवाब और हर समस्या का हल मिल सकता है।

 

अकबर-बीरबल की कहानी: आधा इनाम

यह बात तब की है जब शहंशाह अकबर और बीरबल की पहली मुलाकात हुई थी। उस समय सभी बीरबल को महेश दास के नाम से जानते थे। एक दिन शहंशाह अकबर बाजार में महेश दास की होशियार से खुश होकर उसे अपने दरबार में इनाम देने के लिए बुलाते हैं और निशानी के तौर पर अपनी अंगूठी देते हैं।

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कुछ समय के बाद महेश दास सुल्तान अकबर से मिलने का विचार बनाकर उनके महल की ओर रवाना हो जाते हैं। वहां पहुंचकर महेश दास देखते हैं कि महल के बाहर बहुत लंबी लाइन लगी हुई है और दरबान हर व्यक्ति से कुछ न कुछ लेकर ही उन्हें अंदर जाने दे रहा है। जब महेश दास का नंबर आया, तो उसने कहा कि महाराज ने मुझे इनाम देने के लिए बुलाया है और उसने सुल्तान की अंगूठी दिखाई। दरबान के मन में लालच आ गया और उसने कहा कि मैं तुम्हें एक ही शर्त पर अंदर जाने दूंगा अगर तुम मुझे इनाम में से आधा हिस्सा दो तो।

दरबान की बात सुनकर महेश दास ने कुछ सोचा और उसकी बात मानकर महल में चले गए। दरबार में पहुंचकर वह अपना नंबर आने का इंतजार करने लगे। जैसे ही महेश दास की बारी आई और वो सामने आए, तो शहंशाह अकबर उन्हें देखते ही पहचान गए और दरबारियों के सामने उनकी बहुत तारीफ की। बादशाह अकबर ने कहा कि बोलो महेश दास इनाम में क्या चाहिए।

Akbar Birbal story Hindi

तक महेश दास ने कहा कि महाराज मैं जो कुछ भी मांगूगा क्या आप मुझे इनाम में देंगे? बादशाह अकबर ने कहा कि बिल्कुल, मांगों क्या मांगते हो। तब महेश दास ने कहा कि महाराज मुझे पीठ पर 100 कोड़े मारने का इनाम दें। महेश दास की बात सुनकर सभी को हैरानी हुई और बादशाह अकबर ने पूछा कि तुम ऐसा क्यों चाहते हो।

तब महेश दास ने दरबान के साथ हुई पूरी घटना बताई और अंत में कहा कि मैंने वादा किया है कि इनाम का आधा हिस्सा मैं दरबान को दूंगा। तब अकबर ने गुस्से में आकर दरबान को 100 कोड़े लगवाए और महेश दास की होशियारी देखकर अपने दरबार में मुख्य सलाहकार के रूप में रख लिया। इसके बाद अकबर ने उनका नाम बदलकर महेश दास से बीरबल कर दिया। तब से लेकर आज तक अकबर और बीरबल के कई किस्से मशहूर हुए।

कहानी से सीख
हमें अपना काम ईमानदारी से और बिना किसी लालच के करना चाहिए। अगर आप कुछ पाने की उम्मीद से कोई काम करते हो, तो हमेशा बुरे परिणाम का सामना करना पड़ता है, जैसे इस कहानी में लालची दरबान के साथ हुआ।

 

Akbar Birbal Ki Kahani

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अकबर-बीरबल की कहानी: अंधे या देखने वाले

एक बार की बात है। अकबर और बीरबल किसी बात पर चर्चा कर रहे थे। तभी एक क्षण ऐसा आया, जब राजा अकबर ने कहा, ‘बीरबल दुनिया में हर 100 आदमी के पीछे एक अंधा व्यक्ति होता है।’ राजा की यह बात सुनकर बीरबल ने उनकी इस बात पर असहमति जताते हुए कहा, ‘महाराज मेरे हिसाब से आपका आकलन कुछ गलत प्रतीत होता है। सही मायने में, तो दुनिया में अंधों की संख्या देखने वालों के मुकाबले काफी अधिक है।’

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बीरबल का यह जवाब सुनकर राजा अकबर को काफी आश्चर्य हुआ, उन्होंने कहा, ‘जब हम अपने चारों ओर देखते हैं, तो देखने वाले लोगों की संख्या अंधों से अधिक ही मालूम होती है। ऐसे में अंधों की संख्या देखने वालों के मुकाबले अधिक कैसे हो सकती है?’

राजा अकबर की इस बात को सुनकर बीरबल कहते हैं, ‘महाराज किसी दिन मैं आपको यह बात प्रमाण के साथ साबित करके जरूर दिखाऊंगा कि दुनिया में अंधों की संख्या देखने वालों से अधिक है।’ बीरबल के जवाब पर राजा अकबर कहते हैं, ‘ठीक है प्रमाण के साथ इस बात को अगर तुम साबित कर पाओगे, तो मैं भी इस बात को जरूर स्वीकार करूंगा।’ उस दिन यह बात यही रुक जाती है।

करीब दो दिन बीतने के बाद राजा अकबर इस बात को पूरी तरह से भूल जाते हैं। मगर, बीरबल अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए युक्ति सोचने में जुटे रहते हैं। करीब चार दिन बीतने के बाद बीरबल को एक योजना सूझती है और वे दो मुनीम को लेकर उनके साथ बाजार की ओर चल देते हैं।

Akbar Birbal Hindi story

बीच बाजार पहुंचने के बाद बीरबल सिपाहियों से एक चारपाई की चौखट वहां मंगाते हैं और उसे बुनने के लिए रस्सी भी मंगवाते हैं। अब बीरबल अपने साथ लाए दोनों मुनीमों को आदेश देते हैं कि वे उनके दाएं और बाएं कुर्सी डालकर बैठ जाएं। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि दाएं बैठने वाले मुनीम उनके राज्य में मौजूद अंधों की सूची तैयार करेंगे और बाएं बैठने वाले मुनीम देखने वालों की सूची।

बीरबल का आदेश मानते हुए दोनों मुनीम अपना काम करने के लिए कमर कस लेते हैं और बीरबल चारपाई बुनने का काम शुरू कर देते हैं। बीरबल को बीच बाजार चारपाई बुनते देख धीरे-धीरे वहां लोगों की भीड़ जमा होने लगती है। उस भीड़ में से एक आदमी अपने आपको रोक नहीं पाता है और वह बीरबल से पूछ लेता है, ‘आप ये क्या कर रहे हैं?’

 

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बीरबल इस सवाल का कोई जवाब नहीं देते और अपने दाएं बैठे मुनीम को इशारा देते हैं कि वह अपनी सूची में इस आदमी का नाम लिख लें। जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही थी और आने वाले सभी लोग अपनी उत्सुकता को शांत करने के लिए बीरबल से यही पूछ रहे थे कि वे यहां क्या कर रहे हैं? इसी के साथ बीरबल अपने दाएं मुनीम को इशारा देकर यह सवाल पूछने वालों का नाम अंधों की लिस्ट में डलवाते जा रहे थे।

तभी अचानक वहां एक आदमी आता है, जो बीरबल से पूछता है कि इतनी धुप में बैठ कर आप चारपाई क्यों बन रहे हैं? तब भी बीरबल कुछ नहीं बोलते हैं और बाएं बैठे मुनीम को यह सवाल पूछने वाले का नाम देखने वालों की सूची में लिखने का इशारा देते हैं। यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहता है और धीरे-धीरे पूरा दिन निकल जाता है।

stories in Hindi Akbar Birbal

तभी इस बात की जानकारी राजा अकबर को होती हैं और वे भी माजरा समझने के लिए बाजार पहुंच जाते हैं, जहां बीरबल चारपाई बुनने का काम कर रहा था। राजा भी बीरबाल से यह सब करने के पीछे की वजह जानना चाहते हैं। इसलिए, वह बीरबल से सवाल करते हैं कि बीरबल यह तुम क्या कर रहे हो?

राजा का सवाल सुनते ही बीरबल अपने दाएं बैठे मुनीम को आदेश देते हैं कि अपनी अंधों की लिस्ट में महाराज अकबर का नाम भी शामिल कर दो। बीरबल की यह बात सुनकर राजा अकबर को थोड़ा गुस्सा आया और आश्चर्य भी हुआ।

राजा अकबर ने कहा, ‘बीरबल मेरी आंखें पूरी तरह से ठीक हैं और मैं सब कुछ अच्छी तरह देख सकता हूं। फिर क्यों तुम मेरा नाम अंधों की सूची में चढ़वा रहे हो?’ राजा अकबर के इस सवाल बार बीरबल मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘महाराज आप देख सकते हैं कि मैं चारपाई बन रहा हूं। फिर भी अपने सवाल किया कि मैं क्या कर रहा हूं? अब महाराज ऐसा सवाल तो एक अंधा व्यक्ति ही पूछ सकता है।’

बीरबल का यह उत्तर सुन राजा अकबर को समझ में आ गया कि वह कुछ दिन पहले की गई बात को प्रमाणित करने के लिए यह सब कर रहा है। यह बात समझ में आते ही राजा अकबर भी मुस्कुराते हैं और पूछते हैं, ‘बीरबल तो फिर बताओं कि तुमने अपने इस प्रयास से क्या पता लगाया? बताओ देखने वालों की संख्या अधिक है या अंधों की?’

Hindi story Akbar Birbal

राजा के सवाल पर बीरबल जवाब देते हैं, ‘महाराज मैंने जो कहा था, वहीं बात सच निकली कि दुनिया में देखने वालों के मुकाबले अंधों की संख्या ज्यादा है। मेरे द्वारा तैयार की गई दोनों सूची का मिलान करने से आप भी इस बात को अच्छी तरह से समझ सकते हैं।’

बीरबल का उत्तर सुनकर राजा अकबर जोर से हंसते हैं और कहते हैं, ‘बीरबल तुम अपनी बात को साबित करने के लिए कुछ भी कर सकते हो।’

कहानी से सीख

अकबर बीरबल अंधे बाबा की इस कहानी से यह सीख मिलती है कि दिखाई देने के बाद भी मूर्खता पूर्ण सवाल करने वाला व्यक्ति किसी अंधे के समान ही होता है।

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अकबर-बीरबल की कहानी: कौन है असली मां?

एक बार शहंशाह अकबर के दरबार में बहुत ही अजीब मुकदमा आया, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। हुआ यूं कि बादशाह अकबर के दरबार में दो महिलाएं रोती हुई पहुंची। उनके साथ में लगभग 2 या 3 साल का सुंदर-सा बच्चा भी था। दोनों महिलाएं लगातार रो रही थीं और साथ ही दावा कर रही थीं कि बच्चा उनका है। अब समस्या ये थी कि दोनों शहर के बाहर रहती थीं, जिस कारण उन्हें कोई नहीं जाता था। इसलिए, यह बताना मुश्किल था कि उस नन्हे से बच्चे की असली मां कौन है।

Akbar Birbal story Hindi

अब अकबर बादशाह के सामने मुसीबत आ गई कि न्याय कैसे करें और बच्चा किसको दें। इस बारे में उन्होंने एक-एक करके सभी दरबारियों की राय ली, लेकिन कोई भी इस गुत्थी को नहीं सुलझा सका और तभी बीरबल दरबार में पहुंच गए।

बीरबल को देखकर बादशाह अकबर की आंखों में मानो चमक आ गई हो। बीरबल के आते ही अकबर ने इस समस्या के बारे में उन्हें बताया। अकबर ने बीरबल से कहा कि अब तुम ही इस समस्या का समाधान करो। बीरबल कुछ सोचते रहे और फिर जल्लाद को बुलाने के लिए कहा।

जल्लाद के आते ही बीरबल ने बच्चे को एक जगह बैठा दिया और कहा, “एक काम करते हैं इस बच्चे के दो टुकड़े कर देते हैं। एक-एक टुकड़ा दोनों मांओं को दे देंगे। अगर इन दोनों महिलाओं में से किसी एक को यह बात मंजूर नहीं है, तो जल्लाद उस महिला के दो टुकड़े कर देगा।”

Akbar Birbal Stories In Hindi 

यह बात सुनते ही उनमें से एक महिला बच्चे के टुकड़े करने की बात मान गई और बोली कि उसे आदेश मंजूर है। वह बच्चे के टुकड़े को लेकर चली जाएगी, लेकिन दूसरी महिला बिलख-बिलख कर रोने लगी और बोलने लगी, “मुझे बच्चा नहीं चाहिए। मेरे दो टुकड़े कर दो, लेकिन बच्चे को मत काटो। यह बच्चा दूसरी महिला को दे दाे।”

Akbar and Birbal Short Stories with Morals for Kids

यह देखकर सभी दरबारी मानने लगे कि जो महिला डर की वजह से रो रही है वहीं दोषी है, लेकिन तभी बीरबल ने कहा कि जो महिला बच्चे के टुकड़े करने के लिए तैयार है उसे कैद कर लो वही मुजरिम है। इस बात को सुनकर वह महिला रोने लगी और मांफी मांगने लगी, लेकिन बादशाह अकबर ने उसे जेल में डलवा दिया।

बाद में अकबर ने बीरबल से पूछा कि तुमको कैसे पता चला कि असली मां कौन है? तब बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, “महाराज मां सारी मुसीबतों को अपने सिर पर ले लेती है, लेकिन बच्चे पर आंच भी नहीं आने देती और यही हुआ। इससे पता चल गया कि असली मां वह है जो खुद के टुकड़े करवाने के लिए तैयार है, लेकिन बच्चे के नहीं।”

बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर एक बार फिर बीरबल की बुद्धि के कायल हो गए।

कहानी से सीख
हमें कभी भी किसी दूसरे की चीज पर अपना हक नहीं जताना चाहिए। साथ ही हमेशा सच्चाई की ही जीत होती है और समझदारी से काम लेने पर हर समस्या का हल निकल आता है।

 

About Dilip Singh Sisodiya

Dilip Singh Sisodiya (Onlineyukti.com के संस्थापक) दिलीप सिंह सिसोदिया ने 2019 में Onlineyukti.com नामक एक ब्लॉग के साथ एक साल पहले अपनी ऑनलाइन यात्रा शुरू की। अब दो साल बाद, यह ब्लॉग इंटरनेट पर सबसे सफल हिंदी ब्लॉगों में से एक है।

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