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11+ मोटिवेशनल कविताएँ || Motivational Poems in Hindi

Motivational Poems in Hindi

Motivational Poems Hindi – यहाँ विशेष रूप से आपके मूड और आपके जीवन को बेहतर बनाने और बेहतर बनाने के लिए सुंदर Motivational Poems का संग्रह है। कृपया पढ़ने के माध्यम से जल्दी मत करो।

Motivational Poems in Hindi
यदि आप कर सकते हैं, तो धीरे-धीरे पढ़ें और प्रत्येक कविता को फिर से पढ़ें। यह बेहतर है कि आप प्रत्येक कविता के बारे में विचार करने के लिए कुछ मिनटों का समय निकाल सकते हैं, यह देखने के लिए कि आप किस नए विचारों, दृष्टिकोण को अपने साथ ले जा सकते हैं। आप इस पृष्ठ को इस उद्देश्य के लिए बुकमार्क कर सकते हैं।

तुम मुझको कब तक रोकोगे 

मुट्ठी में कुछ सपने लेकर, भरकर जेबों में आशाएं |
दिलो में है अरमान यही, कुछ कर जाएंकुछ कर जाएं |
सूरजसा तेज़ नहीं मुझमें, दीपकसा जलता देखोगे। 
सूरजसा तेज़ नहीं मुझमें, दीपकसा जलता देखोगे। 
अपनी हद रौशन करने से, तुम मुझको कब तक रोकोगे..
तुम मुझको कब तक रोकोगे..
में उस माटी का वृक्ष नहीं जिसको नदियों ने सींचा है..
में उस माटी का वृक्ष नहीं जिसको नदियों ने सींचा है..
बंजर माटी में पलकर मैंने मृत्यु से जीवन खींचा है
मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँमैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ 
|
शीशे से कब तक तोड़ोगे
मिटने वाला नाम नहीं, तुम मुझको कब तक रोकोगे
तुम मुझको कब तक रोकोगे
इस जग में जितने जुल्म नहीं, उतने सहने की ताकत है..
तानों के भी शोर में रहकर सच कहने की आदत है..
मैं सागर से भी गहरा हूँ
.. मैं सागर से भी गहरा हूँ
..
तुम कितने कंकड़ फेंकोगे,
चुनचुन कर आगे बढूंगा मैं, तुम मुझको कब तक रोकोगे
तुम मुझको कब तक रोकोगे
झुक झुककर सीधा खड़ा हुआ, अब फिर झुकने का शोख नहीं
झुक झुककर सीधा खड़ा हुआ, अब फिर झुकने का शोख नहीं
,
अपने ही हाथों रचा स्वय तुमसे मिटने का खौफ नहीं
,
तुम  हालातो की मुट्ठी में जब जब भी मुझको झोकोंगे..
तब तपकर सोना बनुंगा में, तुम मुझको कब तक रोकोगे
तुम मुझको कब तक रोकोगे
Amitabh Bachchan

चल सको तो चलो 

 सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो 
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
इधर उधर कई मंज़िल हैं चल सको तो चलो 
बने बनाये हैं साँचे जो ढल सको तो चलो
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं 
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता 
मुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो
यही है ज़िन्दगी कुछ ख़्वाब चन्द उम्मीदें 
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
हर इक सफ़र को है महफ़ूस रास्तों की तलाश 
हिफ़ाज़तों की रिवायत बदल सको तो चलो
कहीं नहीं कोई सूरज, धुआँ धुआँ है फ़िज़ा 
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो
Nida Fazli

चलना हमारा काम है 

गति प्रबल पैरों में भरी
फिर क्यों रहूं दर दर खडा
जब आज मेरे सामने
है रास्ता इतना पडा
जब तक मंजिल पा सकूँ,
तब तक मुझे विराम है,
चलना हमारा काम है।
कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया
कुछ बोझ अपना बँट गया
अच्छा हुआ, तुम मिल गई
कुछ रास्ता ही कट गया
क्या राह में परिचय कहूँ,
राही हमारा नाम है,
चलना हमारा काम है।
जीवन अपूर्ण लिए हुए
पाता कभी खोता कभी
आशा निराशा से घिरा,
हँसता कभी रोता कभी
गतिमति हो अवरूद्ध,
इसका ध्यान आठो याम है,
चलना हमारा काम है।
इस विशद विश्वप्रहार में
किसको नहीं बहना पडा
सुखदुख हमारी ही तरह,
किसको नहीं सहना पडा
फिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँ,
मुझ पर विधाता वाम है,
चलना हमारा काम है।
मैं पूर्णता की खोज में
दरदर भटकता ही रहा
प्रत्येक पग पर कुछ कुछ
रोडा अटकता ही रहा
निराशा क्यों मुझे?
जीवन इसी का नाम है,
चलना हमारा काम है।
साथ में चलते रहे
कुछ बीच ही से फिर गए
गति जीवन की रूकी
जो गिर गए सो गिर गए
रहे हर दम,
उसी की सफलता अभिराम है,
चलना हमारा काम है।
फकत यह जानता
जो मिट गया वह जी गया
मूंदकर पलकें सहज
दो घूँट हँसकर पी गया
सुधामिक्ष्रित गरल,
वह साकिया का जाम है,
चलना हमारा काम है।
चलना हमारा काम है 
 शिवमंगल सिंहसुमन

चल रहे हो तो जिंदा हो तुम

दिलो में तुम अपनी बेताबिया लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम,
नज़र में ख्वाबो की बिजलिया लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम!
हवा के झोको के जैसे आज़ाद रहना सीखो,
तुम एक दरिया के जैसे लेहरो में बहना सीखो!
हर एक लम्हे से तुम मिलो खोले अपनी बाहे,
हर एक पल एक नया समा देखे ये निगाहें!
जो अपनी आँखों में हैरानिया लेके चल रहे हो तो ज़िन्द हो तुम,
दिलो में तुम अपनी बेताबिया लेके चल रहे हो तो ज़िन्द हो तुम!
Javed Akhtar Poem

तो क्या हुआ 

 परिस्थितियाँ अगर दलदल हैं तो क्या हुआ ?
मैं खिलूँगा एक दिन कमल बन कर।
मैं लम्हा दर लम्हा लिख रहा हूँ कहानी अपनी,
जो नज़र आएगी एक दिन मुक़्क़मल बन कर।

जमीन मत छोड़ना

सामने हो मंजिल तो रास्ते ना मोड़ना
जो भी मन में हो वो सपना मत तोड़ना
कदम कदम पर मिलेगी मुश्किल आपको
बस सितारे छूने के लिए जमीन मत छोड़ना

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

लहरों से डरकर नोका पार नहीं होती। 
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।।

रखना

आंधियो में पेड़ लगाए रखना,
दलदल में पैर जमाए रखना,
कौन कहता है छलनी में पानी नहीं ठहरता
बस बर्फ जमने तक हाथों को थमाए रखना….

बहुत है

मांझी तेरी किस्ती में तलाबदार बहुत है..
.कुछ उस पार तो कुछ इस पार बहुत है..
तूने जिस शहर में खोली है शीशे की दुकान
उस शहर में पत्थर के खरीददार बहुत हैं

कुछ बनो ऐसा की दुनिया आपके जैसा बनना चाहे।

 

ये प्रेरणादायक पंक्तियां आपके दिल में सोई हुई चेतना को जगाने के लिये आपके सामने प्रस्तुत की गई हैं।
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Dilip Singh Sisodiya

An Engineer by Education, Blogger & Developer by Passion.

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